पर हेल्थ इंश्योरेंस की असली परीक्षा तब होती है जब आपको या आपके घर में किसी को अस्पताल जाना पड़े। उस दिन छूट या गिफ्ट याद नहीं रहते, सिर्फ यह देखा जाता है कि क्लेम पास हुआ या नहीं। तो आज समझते हैं कि health insurance Diwali offers में क्या देखना है और क्या छोड़ देना है।
पहले एक नई बात: अब GST नहीं लगता
22 सितंबर 2025 से व्यक्तिगत हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी पर GST खत्म कर दिया गया है। इससे पहले 18% GST लगता था। यह छूट फैमिली फ्लोटर और सीनियर सिटिज़न प्लान पर भी लागू है, और नई पॉलिसी व रिन्यूअल, दोनों पर।
इसका मतलब है कि अगर कोई ऑफर "GST की बचत" दिखाकर आपको जल्दी खरीदने को कह रहा है, तो वह बचत सबके लिए एक जैसी है, उसमें कुछ खास नहीं। ध्यान रहे कि कंपनी की तरफ से दी जाने वाली ग्रुप पॉलिसी पर अभी 18% GST लगता है।
ऑफर में इन चीज़ों को Ignore करो
🔺"सिर्फ आज" वाली छूट- प्रीमियम आपकी उम्र, शहर और सेहत से तय होता है। इसमें जल्दबाज़ी की ज़रूरत नहीं होती।
🔺फ्री गिफ्ट और वाउचर- क्लेम के समय इनका कोई काम नहीं।
🔺सबसे सस्ता प्रीमियम- सस्ता प्रीमियम अक्सर कम कवर या ज़्यादा शर्तों वाली पॉलिसी का होता है।
🔺"हज़ारों अस्पतालों में कैशलेस"- देश भर के नंबर से मतलब नहीं, आपके शहर में कितने अच्छे अस्पताल जुड़े हैं, यह देखो।
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इन चीज़ों को ज़रूर देखो
1. वेटिंग पीरियड- पहले से कोई बीमारी हो, जैसे शुगर या BP, तो उसका इलाज कितने साल बाद कवर होगा? जितना कम, उतना बेहतर।
2. रूम रेंट की सीमा- अगर पॉलिसी में कमरे के किराए की सीमा है और आपने उससे महंगा कमरा लिया, तो बाकी खर्चे भी उसी हिसाब से कट सकते हैं।
3. को-पे (Co-pay)- कुछ पॉलिसी में हर क्लेम में आपको अपनी जेब से एक हिस्सा देना पड़ता है। प्रीमियम सस्ता दिखे तो पहले यह देखो।
4. सब-लिमिट- कुछ बीमारियों या ऑपरेशन पर पॉलिसी में अलग से सीमा रखी होती है। यह पॉलिसी के दस्तावेज़ में छोटे अक्षरों में लिखी होती है।
5. क्लेम का रिकॉर्ड- कंपनी कितने क्लेम पास करती है और शिकायतें कैसे निपटाती है, यह उसकी वेबसाइट और IRDAI की जानकारी में देखो।
6. कवर कितना है? कवर आपके शहर में इलाज के खर्च के हिसाब से होना चाहिए, सिर्फ प्रीमियम के हिसाब से नहीं।
एक ज़रूरी बात- सच मत छुपाना
फॉर्म भरते समय पुरानी बीमारी, सर्जरी, सिगरेट या शराब की आदत, सब सही-सही लिखो। कोई बात छुपाई और बाद में कंपनी को पता चला, तो क्लेम रिजेक्ट हो सकता है। इसलिए जो है, वही लिखो।
टैक्स बचाने के लिए मत लो
कई लोग सिर्फ टैक्स बचाने के लिए हेल्थ इंश्योरेंस लेते हैं। पर धारा 80D की छूट पुराने टैक्स सिस्टम में मिलती है, नए में नहीं। इसलिए बीमा सुरक्षा के लिए लो। छूट मिल गई तो बोनस समझो। अपनी स्थिति में कितनी छूट है, यह ताज़ा नियम देखकर पक्का करो।
ऑफिस का बीमा काफी है क्या?
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अक्सर लोग सोचते हैं कि कंपनी का बीमा है, अलग से क्या लेना। पर नौकरी छूटने या बदलने पर वह कवर खत्म हो जाता है। उम्र बढ़ने पर नई पॉलिसी लेना महंगा और मुश्किल होता है। इसलिए अपना एक निजी कवर ज़रूर रखो।
खरीदने से पहले ये 5 सवाल पूछो
1.पहले से बीमारी कितने साल बाद कवर होगी?
2.कमरे के किराए की सीमा है क्या?
3.क्या हर क्लेम में कुछ पैसा मुझे देना होगा?
4.मेरे शहर में कितने अच्छे अस्पताल कैशलेस हैं?
5.इस कंपनी के क्लेम का रिकॉर्ड कैसा है?
इन पांच सवालों के सकारात्मक जवाब मिल जाएं तो फिर ऑफर की चिंता मत करना।
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आप किस तरह का हेल्थ इंश्योरेंस देख रहे हो? कमेंट में बताओ।
Disclaimer: यह जानकारी सिर्फ समझाने के लिए है, किसी कंपनी की पॉलिसी लेने की सलाह नहीं। हम इंश्योरेंस सलाहकार नहीं हैं। नियम और प्रीमियम बदलते रहते हैं, इसलिए पॉलिसी लेने से पहले उसका दस्तावेज़ ध्यान से पढ़ें और ताज़ा नियम जांच लें।
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